Wednesday, May 27, 2026

कल जो हम ना रहें , जश्न चलता रहे


कोई परवाना था किस्सों में, राग में
कोई किताब में, बिरहा की आग में
कान्हा, ये खेला है क्या?
खोल के पंख वो जब वन में उड़ा
रात में रोशनी तक हुआ बावरा
कान्हा, ये खेला है क्या?

ऐसा वो नादान था, आग से ही प्यार था
मौत भी जो आए तो वो हँस के मरे, 
आशिक़ाना
जश्न चलता रहे, मैं तुम्हारा
कल जो हम ना रहें 
आशिक़ाना


और कोई थी शमा, कोई आफ़ताब सी
बातें रबाब सी, कच्ची शराब सी
कान्हा, ये खेला है क्या?
नशा ऐसा चढ़ा, बेख़ुद हो गया
प्रेम की लपटों में परवाना खो गया
कान्हा, ये खेला है क्या?

जलते चिरागों में तू जो मिला
सूरज में पाया जो तेरा पता
चंदा में देखी जो तेरी छवि
पागल हुआ मैं, दीवाना हुआ
हमने माना दगा फिर करोगे नहीं
ये तो ग़ालिब को भी है पता
जब हो तुमको खबर, 'गर ना आऊँ नज़र
उसमें, जाना, मेरी क्या ख़ता

ऐसा मैं नादान था, आग से ही प्यार था
मौत भी जो आए तो हम हँस के मरे, 
आशिक़ाना
जश्न चलता रहे, मैं तुम्हारा
कल जो हम ना रहें 
आशिक़ाना
जश्न चलता रहे, मैं तुम्हारा


आ करके बैठो, 
अब ना सताओ
देखो, मेरी जान, 
हुई शाम है
आँसु को पोंछो, 
बाहों में आओ
कितनी, मेरी जान, 
तू परेशान है
ढल गई है घटा, 
उड़ गया है धुआँ
बाहों में आ सो जा, 
मुझमें तू गुम हो जा
कल को रिहा दो, 
ग़म को भुलाओ
देखो ना, कितना आराम है


ऐसा तू नादान था, आग से ही प्यार था
मौत भी जो आए तो तू हँस के मरे, 

आशिक़ाना
जश्न चलता रहे, मैं तुम्हारा
कल जो हम ना रहें 
आशिक़ाना
जश्न चलता रहे, मैं तुम्हारा
आशिक़ाना
जश्न चलता रहे, मैं तुम्हारा
कल जो हम ना रहें आशिक़ाना
जश्न चलता रहे, मैं तुम्हारा
आशिक़ाना
जश्न चलता रहे, मैं तुम्हारा


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